Friday, September 25, 2020

झाड़ उखाड़ हनुमान यात्रा

 झाड़ उखाड़ हनुमान, इंदौर मध्यप्रदेश 


12- 09-2020 


पहले ही सोच रखा था की आने वाले शनिवार को छुट्टी पड़ रही है तो कही घूमने निकलना है तो हमेशा की तरह बिना प्लान के गाद्दी उठायी ओर वाइफ के साथ घर से चल दिये । 


रास्ते मे फोन पर जानकारिया जुटायी गयी ओर तय हूआ "झाड़ उखाड़ हनुमान" जो की इंदौर से पूर्व की तरफ है जहाँ रालामंडल होते हुए जाया जा सकता है ओर खंडवा रोड से तिन्छा के रास्ते भी जाया जा सकता है हम चुकी देवास से गये थे तो रालामंडल वाला रूट सही था ।


मेरे लिये भी ये एकदम नयी जगह थी क्योंकि जब भी कोई एक या दो दिन का प्लान होता है तो आसपास की सभी स्थानों का भ्रमण किया हुआ है या सुना हुआ रहता है । 


मन मे काफी उत्सुकता थी क्योंकि जिन 'महानुभाव' ने हमे यहाँ जाने का सुझाव दिया था उन्होंने पहले ही उस जगह की तारीफों के पुल बांध दिये थे । 


देवास से रालामडल जाते समय खतरनाक वाली उमस हो रही थी ओर ये गर्मी देखकर लग रहा था, शायद लगत समय का चुनाव हुवा है पलट जाना चाहिये ।


लेकिन आगे जाकर इंद्रदेव प्रसन्नं हो गये ओर यात्रा सार्थक हो गई,थोड़ा आगे जाकर.......खुबसूरत नजारों ने अपनी उपस्तिथि दर्ज करवायी वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर लग रहा था मानो हम कही बहुत दूर आ गये हो विश्वास करना कठिन हो रहा था की क्या हमारे इतने नजदीक भी इतनी खुबसूरत जगह है, मन ही मन मे जिस  महानुभाव ने यहां जाने की हिदायत दी थी धन्यवाद दे रहा था ।


घुमावदार रास्तो पर बाइक चलाने का अनुभव ओर साथ साथ लगातार चल रहें सागवान और पता कौन-कौन से पेड़ पौधें, समतल घास के मैदान, घाट ओर हल्की बारिश वहाँ की खुबसूरती को ओर भी खुबसूरत बना रही थी.....।



रास्ते में घूमते-फिरते फोटो वोटो लेते हुये चलते रहे ....


अब रास्ता थोड़ा लम्बा मालुम हो रहा था तो गूगल बाबा पर लोकेशन चेक करने पाया की 8-10 की.मी आगे आ गये है।



समय का पता भी नही चला ओर समय हो चला था 3.30 के करीब , मतलब अब भोजन का समय हो गया था अब शान्त रहना थोडा मुश्किल हो गया था क्योकि मेंने रास्ते मे श्रीमती जी से आग्रह किया था की खाना पैक करवा लेते है लेकिन उनका फेसला था की खाना उधर से आकर ही खायेंगे....

भूख अब सहन नही हो रही थी उपर से हम रास्ता भटक चूके थे। आसपास  कोई दुकान या होटल भी नही था, खेर मेंने फिर से अपनी फटफटिया को स्टार्ट किया ओर ले लिया यू-टर्न .....सोचा दर्शन करके फटाफट निकलते है ।


थोडी देर बाद मंदिर पहुँच गये बजरंगबली मे हमारी श्रद्धा हमेशा से ही रही है अंदर जाकर देखा तो कुछ लोग माइक, स्पीकर इकठ्ठा कर रहे थे दर्शन करने के बाद जब थोड़ी दूर नजर पड़ीं तो मंदिर प्रांगण में बहुत से लोग खाना खा रहे थे ओर बढ़ीया वाली खुशबू आ रही थी ।

बस फिर क्या था मैं समझ चुका था की यहाँ जरूर सुंदरकांड का पाठ हूआ होगा ओर अब भोजन का प्रोग्राम है


 श्रीमती जी कुछ समझ पाते उसके पहले ही मेने कहा "चलो भोजन की व्यवस्था हो गयी है"

कहाँ'....."ऐसे किसी के प्रोगाम मे जाना ठीक नही है'

में बीन कुछ कहे आगे-आगे चल दिया वो भी पीछे-पीछे आ गये क्योकि भूख तो कडाके की लगी थी 

मेने जो लोग खडे थे उनसे "जय श्री राम' किया ओर बेठ गये मजे से भोजन करने...अह्हा बड़ी ही स्वादिष्ट दाल-बाटी बनी थी ..वहां कुछ लोग मजकिये तोर पर कह रहे थे भाई " जो भी लाना दो लाना" 


सब को दो दो बाटी रखी गयी, पहले दाल आयी फिर सुखी बाटी...ओर फिर लास्ट मे 'घी' मतलब "गड्डे वाली बाटी"

पेट भर खाना खाया हनुमानजी का धन्यवाद किया ओर आशीर्वाद लिया'

सब लोगों को "जय श्री राम" बोलकर फिर से वही नजारों का लुत्फ लेते हुये रात तक पहुँच गये गृहस्थाश्रम .....

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