Wednesday, July 18, 2018

बिना योजना यात्रा

15 को श्री मतीजी का जन्मदिन आ रहा था , इस बार पहले से ही सोच रखा था कि कही बार एक दो दिन के लिए घूमने निकल जायेंगे। क्योंकि मैं भी करीब एक साल से कही बाहर नही निकला था। सो कैलेंडर देखा और मन खुश हो गया क्योंकि 15 जुलाई को संडे था , झट से सैटरडे की छुट्टी की अर्जी लगा दी..

अब दो दिन थे मेरे पास पर कोई प्लान नही था कि किधर जाना है, दिमाग मे आइडिया आया कि हमारे भाई साब घुमक्कड़ सुमित जी से बात की जाए...तुरंत रिप्लाई आया और उदयपुर , माउंटआबू , सापुतारा जगह सुझाई गई लेकिन सारी जगह देवास से लगभग 15 से 20 घंटे की दूरी पर थी जो कि 2 दिन में कवर करना मुश्किल था । फिर से    रिप्लाई आया जिमसें ओम्कारेश्वर मांडव माहेश्वर आदि का नाम था।
फिर भी हम सुनिश्चित नही कर पा रहे थे कि जाना कहा है ...

बिना सोचे समझे बाइक उठाकर निकल पड़े सैटरडे मॉर्निंग..

रास्ते मे डिसाइड हुआ ओम्कारेश्वर ...

भाग-1

2 comments: